धूप और छाँव

  new कुछ लोग कहते हैं की धूप सत्य है और छाँव बहरूपिया। धूप जीवन भर्ती है पेड़ों में पौधौं में, धरा में लेकिन छाँव तले जो सुख मिलता है वह ज़्यादा देर  नहीं टिकता।  धूप रंग भरा है तो  छाँव रंगहीन । छाँव और धूप  के खेल में एक  जादुई सी रंगत है  लेकिन खेल तो इसमें  सूरज का ही है  । धुप और छाँव दोनों से हम प्रेम तो करते हैं लेकिन सच कहूँ तो धुप संघर्ष का प्रतीक है और छाँव सुख का ।  और उसी संघर्ष और सुख की आकांक्षा के धूप छाँव के बीच ज़िन्दगी गुजर जाती है ।     img_20161022_225612   dsc_0056   आशा करती हूँ आपको मेरा ब्लॉग पसंद आया ।
Written By
More from preeti

A New Flea Market In Hyderabad

I recently visited a very interesting flea market “Treasure Trunk Market” in...
Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *